पुष्पगिरी तीर्थ पर भगवान सुविधिनाथ पुरातत्व संग्रहालय केन्द्र का निर्माण किया जावेगा। 3 करोड की लागत से निर्मित होने वाले संग्रहालय में देश के अनन्य भागों में बिखरी पडी प्राचीन प्रतिमाओं को यहां लाकर अन्वेषण किया जावेगा जो विलक्षण ही नहीं होगा अपितु चौंकाने वाला भी होगा। इस बात के पूरे प्रयास किये जावेंगे कि पुष्पगिरी संग्रहालय को देश का सबसे बडा संग्रहालय बनाया जा सके।
30 हजार स्क्वायर फीट में फैले म्यूजियम का एक मात्र मुख्य उद्देश्य महापुरूषों की जीवन गाथा, उनकी जीवन शैली तथा उनकी अनमोल वाणी जन-जन तक पहुंचाना है। इसके लिए इलैक्ट्रोनिक सजीव पुतलों का उपयोग किया जावेगा तथा ऐसी अन्डर ग्राउण्ड तकनीक का सहारा लिया जावेगा जो कि भारत में आज कहीं भी देखने को नहीं मिलती है जिसे पर्यावरणीय एवं पुरातत्व दृष्टि से तराशा जावेगा।
पुष्पगिरी म्यूजियम में आदि पुरूष तीर्थकर ऋषभदेव से लगाकर अंतिम तीर्थकर भगवान महावीर की जीवन झांकी के साथ-साथ हिंदु संप्रदाय के अनेकों महापुरूषों की जीवन झांकी मुख्य रूप से प्रदर्शित की जावेगी।