पुष्पगिरी तीर्थ पर मुनिश्री पुलक सागर वात्सल्य धाम के दो खण्ड बनकर तैयार है। प्रथम खण्ड में 21 कमरे विथ लेटबाथ है जिसमें वर्तमान में 36 स्त्री, पुरूष निवास कर रहे है। द्वितीय खण्ड में 33 कमरें कॉमन लेट बाथ के बनाये गये है जिसमें भजनशाला का निर्माण भी किया गया है। आगामी योजना के अन्तर्गत सात खण्डों का निर्माण किया जावेगा।
वात्सल्य धाम में आत्मार्थियों को भोजन, आवास तथा दूध-नाश्ता आदि की निःशुल्क व्यवस्था प्रदान की गई है। वात्सल्य धाम में प्रवेश प्रारम्भ है।
वात्सल्य धाम में जिन्हें कोख अच्छी नहीं मिली, उन्हें गोद अच्छी मिलेगी। मातृत्व भाव और ममता की तरसती बंजर गोद में संतान रूपी प्रेम के फूल खिलेंगे। कांपते अधरों को मुस्कान और लडखडाते पैरों को सहारा, झुर्रियां पडी वृद्ध आशाओं को श्रवण कुमार का संबल एवं जीवन की संध्या को परमात्मा की गोद का अस्तांचल मिलेगा। ऐसी पावन पवित्र अवधारणा है वात्सल्य धाम की।
प्राकृतिक और नैसर्गिक सौन्दर्य, प्रदूषण मुक्त वृहद परिसर जृद्ध, पुरूष, महिलाओं एवं बच्चों के पृथक-पृथक भवन होंगे। इस वात्सल्य धाम में आठ विशाल भवन होंगे जिनमें 6 आवासीय एवं एक भ्ज्ञवन भोजनालय - रसोईघरक भवन कार्यालय, अतिथिगृह, कार्यकर्ता भवन इत्यादि युक्त होगा।