पुष्पगिरी तीर्थ पर दो विशाल जिनालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। जिनालय पूर्ण रूप से लाल पत्थरों से निर्मित है तथा पत्थर की नक्काशी का कार्य अनुभवी शिल्पियों द्वारा उकेरा जा रहा है। उक्त जिनालय 72 फीट ऊंचे होगे जो 21 वीं सदी की जैन स्थापत्य कला एवं संस्कृति की अनुपम कृति होगी।
वर्तमान में पुष्पगिरी तीर्थ पर मंदिर नं. 01 भगवान पार्श्वनाथ जिनालय आस्था का केन्द्र है। जिनालय मे भगवान पार्श्वनाथ की 1500 वर्ष प्राचीन अतिशयकारी प्रतिमा विराजमान है जो कि आचार्य श्री पुष्पसागर दंत सागर जी महाराज को स्वप्न के माध्यम से समीप के गांव से प्राप्त हुई है। प्रतिदिन यहां पर सैकडों श्रद्धालुजन अपनी मनोभावना प्रकट करते है और मनोकामना पूर्ण होने पर छत्र एवं श्रीफल चढाकर भगवान के चरणों में कृतज्ञता प्रकट करते है।
मंदिर नं. - 2 में भगवान पद्मप्रभु भगवान की अतिशतकारी प्रतिमा विराजमान है, जो कि बहुत ही मनोहारी एवं देखते ही बनती है।
मंदिर नं. - 3 भगवान आदिनाथ जिन मंदिर में नयनाभिराम प्रतिमा विराजमान है, उक्त प्रतिमा मुनिश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज के स्वप्न में प्राप्त संकेतों के आधार पर ऊपर पहाडी पर विराजमान की गई है।